कॉर्नवाल से सप्रेम1
Arvind Gupta, Director, VIF
प्रिय गैर-समूह7 नागरिकों

आपने 12-13 जून 2021 को कॉर्नवाल में समूह-7 लोकतांत्रिक देशों के खुशहाल परिवार की प्यारी सामूहिकतस्वीरें देखी होंगी। मौसम सुहावना था। समुद्र तटोंपरधूप सेंकनेके लिए बढ़िया माहौल था। हम इस बात से भी बेफिक्र थे कि व्यापार शुल्क के मसले पर 2018 में कनाडा समूह7 शिखर सम्मेलन के रंग में भंग डालने वाले ट्रंप इस बार सम्मेलन में हिस्सा नहीं ले रहे थे। हम कॉर्नवाल के बेहद शानदार प्राकृतिक नजारों के बीच आराम से वाइन का आनंद ले सकते थे। हमारे साथ अंकल जो की मौजूदगी वाकई कमाल थी। उन्होंने अपने कई पुराने किस्से सुनाए। वह बीच-बीच में हमें'बिल्ड-बैक-बैटर' के लिए प्रेरित करते रहे। यह वाकई प्रेरणादायक आह्वानथा।

हमारे मेजबान बोरिस बेहद खुश थे। कॉर्नवाल में बैठकर हम इस बात से आश्चर्यचकित थे कि आखिर इसके पूर्वजोंने पूरे विश्व में फैले साम्राज्य को कैसे खड़ा किया होगा। लेकिन ये अंग्रेज होशियार तो हैं। क्या वाकई ऐसा नहीं हैं? उनके पास हमेशा एकाध चाल ऐसी होती है जिसका ये लोग जरूरत पड़ने पर उपयोग करते हैं। उत्तरी आयरलैंड को लेकर बोरिस का भले ही यूरोपीय संघ से झगड़ा हो गयापरंतु उन्होंने इस विवाद के चलते शिखर सम्मेलन का सौहार्द नहीं बिगड़ने दिया। यहां तक कि कनाडा के प्रधानमंत्री भी चेहरे पर मुस्कान ओढ़े हुए थे, भले ही उनके देश में मुस्लिम परिवार पर हुए हमले से वह बेहददुखी थे। जापानी प्रधानमंत्री भी इस बारे में आश्वस्तनहीं थे कि ओलंपिक रद्द करना है या इसे करवाना है, फिर भी वह शांत बने रहे। बेशकहमने उन्हें सलाह दी कि वह अपने देश में प्रचंड कोविड की परवाह किए बिना ओलंपिक करवाएं। आखिर कोविड की लहरेंआती-जातीरहती हैं परंतु ओलंपिक की मेजबानी का सम्मान कभी-कभार ही मिलता है। अदम्य जर्मन चांसलर पूरे समय चिंतित थीं। वह जल्द ही जर्मनीकी राजनीतिक भागदौड़ से बाहर निकलने पर विचार कर रही हैं। जर्मन चांसलर का बैठक में शांत रहनाअच्छी बात थी।

बेशक इधर-उधर कुछ प्रदर्शनकारी भी थे परंतुउनका भी स्वागत है क्योंकि वे इसमें नए रंग जोड़ते हैं और माहौल में उल्लास लाते हैं और इससे मीडिया का ध्यान भी हमारी ओर खिंचता है।आप पूछ सकते हैं कि कॉर्नवाल की सैर से हमने क्या हासिल किया? बेशक, हमने स्वास्थ्यप्रद प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया और हमें कुछ ऐसा समय मिला जब हम वैश्विक समस्याओं को इनसे थोड़ा दूर हटकर देखसकते थे। कुछ समय के लिए हम अपनी चिंताएं भी भूल गए।

हमारे काबिल सहायकों ने शानदार 70-पैराग्राफ का दस्तावेज तैयार किया है जिसे आप चाहें तो इंटरनेट पर पढ़ सकते हैं। इसमें काफी कुछ लिखा है जिसे हम नेताओं ने भी नहीं पढ़ा है क्योंकि हम काफी व्यस्त रहते हैं। इस लंबे-चौड़े ग्रंथ में जो लिखा है अगर आप इसे समझ न पाएं तो इसमें आपका कोई दोष नहीं है। इसके लिएआपको या तो व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट पढ़नी चाहिए या मशहूर हस्तियों के ट्वीट पढ़ने चाहिए।

फिर भी हम आपको विश्वास दिलाते हैं कि विनाशकारी महामारी और दुनिया के बड़े हिस्से में टीके नहीं होने की हल्की-हल्की आवाजें हमारे कानों तक पहुंच गई है। हमें गहरा दुख हुआ। बेशक,हमने अपने देशों में महामारी पर काबू पा लिया हैजैसा कितस्वीरों में हमारे बिना मास्क के मुसकुराते चेहरों को देखकर आप समझ सकते हैं।

हम वैक्सीन की स्थिति को लेकर काफी चिंतित थे। हम जानते हैं कि यदि आप बाकी दुनिया के लोग अपनाटीका करण नहीं करवाते हैं तो हम विकसित दुनिया के लोग भी सुरक्षित नहीं हैं। आप लोग हमें वायरस के नए-नए मुश्किल वेरिएंट भेज सकते हैं। आप सभी को टीका लगवाना चाहिए। इसमें तो कोई शक ही नहीं है। सवाल यह है कि ऐसा कब होगा? इसलिए हमने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है कि 2022 के अंत तक दो अरब वैक्सीन की खुराकें आप तक पहुंच जाएगी। हम उदारता दिखाएंगे और हमारे स्टॉक में जितने भी अतिरिक्तटीके होंगे, उनमें से कुछ को हम दान कर देंगे। क्या कहा? सात अरब की आबादी के लिए यह सब काफी नहीं है? बहरहालआपको धैर्य रखना चाहिए। आप हमारी कंपनियों से टीके खरीद सकते हैं। आपको अपने टीके खुद बनानासीखना चाहिए। हमसे जितना हो पाएगा हम आपकी सहायता करेंगे। इस समय हम आपको जो दे सकते हैं, उससे खुश रहें।

बौद्धिक संपदा अधिकार छूट का मुश्किलसवाल न उठाएं। बेशकहमने इस पर चर्चा की और सच कहा जाएतो हममें से कुछ लोगोंकी छूट में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी। आइए इस मुद्दे पर डब्ल्यूटीओ को फैसला करने दें। तब तक धैर्य रखें और भगवान पर भरोसा रखें।

क्या आपने देखा, हमने चीन के बीआरआई का किस चतुराई से हल निकाला? जी हां, हम आपके देशों में विशाल बुनियादी ढांचे का निर्माण करेंगे, यह सब उसके कुख्यात बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत शी द्वारा बनाए गए बुनियादी ढांचे से कहीं बेहतर होगा। हम आप पर उस तरह कर्ज का बोझ नहीं डालेंगे, जैसे उसने किया है। उसकी नजर आपकी अचल संपत्ति पर है। हमारा निजी क्षेत्र आपके लिए सबसे बेहतर गुणवत्ता, ऊंचे मानकों वाले बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा। इसके लिए पैसा कहां से जाएगा? आप फिर से मुश्किल प्रश्न पूछ रहे हैं। सही समय आने पर हम इस समस्या से निपट लेंगे। तब तक हम पर भरोसा रखें।

हमने और क्या किया? जी हां, हमने जलवायु परिवर्तन के बारे में काफी बातें की। यह ऐसी समस्या है जो हमारे दिल के करीब है। हम चाहते हैं कि 2050 तक आप सभी का शुद्ध उत्सर्जनशून्य हो। अपने गंदे-पुराने कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्र बंद कर दीजिए। हमारी कंपनियों ने आपके लिए स्वच्छ तकनीकें विकसित की हैं। इनका उपयोग करें। पैसा कहां से आएगा? हमने फैसला किया कि इस उद्देश्य के लिए प्रतिवर्ष100अरब अमरीकी डालर दिए जाएंगे। हांभाई, हां! हम जानते हैं कि हमने यह वादा पहले भी किया था। फिर भी हम पर भरोसा रखें। हम इस बार किसी तरह इसकी व्यवस्था करेंगे।

और हां, शून्य-कार्बन वाली दुनिया के लिए, हमें बार-बार यह याद दिलाने की जरूरतनहीं है कि हमने वातावरण में बचे अधिकांश कार्बन स्थान पर पहले ही कब्जा कर लिया है। वह इतिहास की बात थी। आइए हम अपने आने वाले सुंदर भविष्य के बारे में सोचें। यदि आप अपनी अर्थव्यवस्थाओं को तेजी से कार्बन मुक्त करते हैंतो ऐसा करना हमारे बच्चों और उनके बच्चों के लिए अच्छा होगा। जहां तक हमारी बात है, हम 2010 के स्तर के मुकाबले2030 तक अपने उत्सर्जन में 50% की कमी करेंगे। हम ऐसा करने का प्रयास करेंगे। हमारा विश्वास करें, हम ऐसा जरूर करेंगे। यदि हम ऐसा नहीं करते हैं तो इस बारे में हमसे 2030 के बाद ही सवाल पूछें। इस बीचआप अपने कार्बन स्टॉक्स कम करने पर ध्यान केंद्रित रखें।

आप हमें अमीरों का खास क्लब बताते हैं? हम इससे मना नहीं करते। दरअसलहमें अपने खास होने पर काफी गर्व है। हम समूह-20 की तुलना में ज्यादापाक साफ(ज्यादा लोकतांत्रिक) हैं। समूह-20 तो ऐसी रंग-बिरंगीभीड़ है जिसमें हमारे सिरदर्द चीन और रूस भी शामिल हैं। समूह-7 में हम बातचीत के लिए दूसरों को भी आने का अवसर देते हैं। इस वर्ष पर्यवेक्षक के रूप में हमारे साथ हमारे मित्र देश भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका मौजूद थे। हम भारतीय प्रधानमंत्री से काफी प्रभावित थेजिन्होंने अपनेठेठ एक-पंक्ति वाले संबोधन में हमें "एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य" नीति का पालन करने की सलाह दी। ओह ... यह विचार अच्छा है। हम इसके बारे में विचार करेंगे। श्री मोदी को ये विचार आखिर मिलते कहां से हैं? बेशक,भारत की सभ्यतागत विरासत से? जी हां,हमने वसुधैव कुटुम्बकम और योग के बारे में सुना है। यह सारा संसार एक परिवार है। क्या बढ़िया विचार है! समूह-7 भी एक परिवार है। उस पर भी, एक महान सुखी परिवार।

हम मानते हैं कि कॉर्नवाल के इर्दगिर्ददो तानाशाही शासनअदृश्य बीयर और ड्रैगन भी मंडरा रहे थे। इनसे निपटना वाकई सिरदर्द है। इनमें से एक हमारी चुनाव प्रक्रिया में दखल देता रहता है तथा हमें अस्थिर करता है और दूसरामहाशक्ति बनने की महत्वाकांक्षा रखता है। हम ऐसा कैसे होने दे सकते हैं? रूस से तो हम वाकई, वाकई बेहद नाराज थे। संयुक्त वक्तव्य में हमने सात बार इसका उल्लेख किया। हमने पुतिन से कई काम करने के लिए कहा है। हालांकि हम आश्वस्त नहीं है कि वह हमारी बात सुनेगा या नहीं।

चीन जो कुछ करने की कोशिश कर रहा है हम उससे चिंतित हैं। वह केवल सबसे आगेही नहीं रहना चाहता बल्कि दक्षिण चीन सागर, हांगकांग, झिनजियांग में इसका दुर्व्यवहार भी दिन-प्रतिदिनबद से बदतर होता जा रहा है। लेकिनहम क्या करें? हम शी को नजरंदाज नहीं कर सकते। हम उससे नहीं लड़ सकते। हम मजबूर हैं। चीन ने हमारी अर्थव्यवस्थाओं में पैठ बना ली है, हमारी तकनीकें चुरा ली हैं और बहुपक्षीय प्रणालियों में प्रवेश कर लिया है। अंत में हमने अपने संयुक्त वक्तव्य में चार बार चीन का उल्लेख करने का निर्णयलिया। इससे उसे हमारी नाराजगी का मजबूत संकेत मिलना चाहिए। हालांकि हम काफी सतर्क भी थे। हमने प्रयोगशाला से लीक होने की बात बिल्कुल नहीं छेड़ी। हम मानते हैं कि जब चीन से निपटने की बात आती है तो हम सभी एकमत नहीं थे। फिर भीहमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की।

हमें शिखर सम्मेलनों से लगाव है। इससे हमें अलग-अलग मामलों पर लंबी-लंबी चर्चाएं करने का अवसर मिलता है। समय सीमाओंका पालन करने का कोई दबाव नहीं है। वादे पूरे नहीं करने की कोई शिकायत नहीं करता। शिखर सम्मेलनों में सारी बातचीत एकतरफा है। इसलिएहमने ईरान, इथोपिया, म्यांमार, यूक्रेन और टाइग्रे के बारे में बात की जो कि उभरते राजनीतिक संकटों के नए केंद्र हैं। हम थक गए थे। इसलिए हमने फैसला लिया कि सीरिया, लीबिया या यमन के बारे में बात नहीं की जाएगी। ये पुरानी लड़ाइयां हैं और लगातार चल रही हैं। उन पर इन दिनों मीडिया भी ज्यादा ध्यान नहीं देता है। रूस और ईरान ने किसी तरह हमारे ऊपर अप्रत्याशित बढ़त बना ली है। इसलिए हम चुप रहे।

लेकिन हमने साइबरस्पेस के बारे में काफी बात की। हम अपने बुनियादी ढांचे पर बढ़ते साइबर हमलों से चिंतित हैं। टेराबाइट्स के जरिए हैकर्स हमारा डेटा चुरा लेते हैं। उन्होंने हमारी पाइपलाइनों को बंद कर दिया और स्वास्थ्य एवं शिक्षा नेटवर्कों को अपना निशाना बनाया। साइबर हमले ऐसे उपद्रव हैं। अगर हमें हैकर्स मिल जाएं तो हम उन पर बमबारी करेंगे। हमारा स्पष्ट रूप से मानना है कि साइबर स्पेस पर भी अंतरराष्ट्रीय कानून लागू होने चाहिए। परंतु रूस और चीन के अपने अलग विचार हैं। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर वे हमसे सहमत नहीं हैं। यह बड़ी समस्या है।

और क्या? जी हां,हमने यह नया शानदार विचार भी सब के सामने रखा कि कॉर्पोरेट कर को न्यूनतम15%रखाजाए। हम इससे उत्साहित हैं। हम इस पर और अधिक बल देंगे। परंतु क्या यह प्रस्ताव सभी को मंजूर होगा? हम नहीं जानते। हमें इस बात की चिंता है कि कर मुक्त देशों में फल-फूल रही हमारे लिए पैसा कमाने वाली हमारीबड़ी-बड़ी कंपनियां ही इस प्रस्ताव का विरोध करेंगी। जब यह नौबत आएगी तब इस बारे में सोचा जाएगा।

समूह-7 से बाहर के चार देशों को पर्यवेक्षकों के रूप में हमारे साथ जोड़कर हमें खुशी हुई। हमने उन्हें 'मुक्त समाज' के संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने के लिए सहमत किया। मीडिया से हमें पता चलता है कि भारत को इस बारे में कुछ चिंताएं थीं कि ये खुले समाज साइबरस्पेस हेरफेर के प्रति असुरक्षित हो सकते हैं। हमें खुशी है कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हमारे साथ है। इससे हमारी विश्वसनीयता बढ़ेगी।

हमें खुशी है कि हम व्यक्तिगत रूप से मिल सके। ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि हमने पिछले साल ही सभी उपलब्ध वैक्सीन स्टॉक खरीद लिए थे। हम आशा करते हैं कि शेष विश्व को हम जो दान कर रहे हैं, उससे आप भी शीघ्र ही इस महामारी को काबू कर सकेंगे। इस बीचइस वर्ष के अंत में समारोहों के कई दौर होंगे। यह बेहद रोमांच भरा है! पहले ओलंपिक आएगा और फिर नवंबर में हम ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन बैठक के लिए औरअक्तूबर में कुनमिंग में जैव विविधता सम्मेलन की बैठक के लिए इकट्ठा होंगे। ओह! हमने इन अद्भुत शिखर सम्मेलनों, सुंदर जगहों, उत्तेजक चर्चाओं, शानदार भोजन और मनोरंजन को काफी याद किया। और हमेंइसकी भी याद सताती रही कि हम कैसे संयुक्त वक्तव्य और विज्ञप्तियां तैयार करना पसंद करते थे जिन्हें शायद ही कोई समझता हो। इसके अलावाकुछ दिनों बाद शायद ही ये किसी को याद रहते हैं। यही इन महान शिखर सम्मेलनों की सुंदरता है। परंतुफिर भीसमूह-7 शिखर सम्मेलन सबसे अलग है।

आइए हम आपको आश्वस्त करते हैं कि बहुपक्षवाद के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता है। शिखर सम्मेलन दुनिया के रक्षक हैं। अगले शिखर सम्मेलन में फिर मिलेंगे। तब तक, महामारी और टीका करण के लिए शुभकामनाएं।

समूह-7 शिखर सम्मेलन में दिलचस्पी के लिए धन्यवाद। आशा है आपको कार्यक्रम पसंद आया होगा।

समापन नोट्स

  1. यह हाल ही में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थलकॉर्नवाल से प्राप्त काल्पनिक धन्यवाद संदेश है।

Translated by Shiwanand Dwivedi (Original Article in English)


Image Source: https://images.indianexpress.com/2021/06/G7-group-photo-meme.jpg

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